हिंदी और तमिळ में डोमेन नाम


परसों विंट के मुँह से सुना और आज ख़बर अख़बार में थी. अनुनाद ने भी आज इसका ज़िक्र किया है.

अगले साल के अंत तक पूरे के पूरे डोमेन नाम (टीएलडी यानि शीर्ष-स्तर डोमेन नाम समेत) लैटिन के अलावा 11 अन्य लिपियों में प्रयोग किए जा सकेंगे. भारतीय लिपियों में हिंदी (देवनागरी) और तमिळ को इस शुरुआती दौर के लिए चुना गया है.

परीक्षण इसी 15 अक्टूबर से शुरू हो जाएगा, जब आइकैन व्यक्तियों और व्यापारों को इसे जाँचने के तरीके मुहैया कराएगा. अभी हालाँकि इन नामों के पंजीकरण तो शुरू नहीं होंगे, पर आपसी संवादों, ई-मेल, वेब कड़ियों में इन्हें इस्तेमाल किया जा सकेगा. आइकैन के अनुसार एक तरह से पूरी दुनिया को इस प्रणाली को तोड़ने के लिए आमंत्रित किया जाएगा. आप भी तैयार रहिएगा :).

नागरी के मामले में कुछ बातें हैं जिन्हें परखने के लिए मैं उत्सुक रहूँगा. मसलन भिन्न कूटांको वाले पर एक से दिखने वाले हिंदी शब्दों को यह सिस्टम कैसे सँभालेगा. यह जानना भी दिलचस्प होगा कि हिंदी में .com या .org आदि डोमेनों को कैसे लिखा जाएगा.

क़दम स्वागत योग्य है, भले ही ज़रा देर से उठा है. उस दिन का इंतज़ार रहेगा जब सिर्फ़ नागरी जानने वाला एक व्यक्ति "गूगल.कं.भारत", "वेब.बीबीसीहिंदी.कॉम" या "भारत.सरकार" जैसा कुछ टाइप कर भी इन गंतव्यों पर पहुँच पाएगा.

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