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Think India Journal popularly known as Think India Quarterly is now UGC Care listed. We are accepting submissions for publication, send papers for review to editor@eduindex.org Title of the document As the journal is published quarterly, we call it Think India Quarterly, some people call it Think India journal as it is a journal.

मानवता के साथ विकास

पाषाणकालीन सभ्यता के आरंभिक लक्षणों को अपनाने के बाद से मानव ने जिस तीव्र गति से अपना विकास किया है, वह निश्चित रूप से सराहनीय है, परन्तु जैसे कभी भी सारे अच्छे काम एक साथ नहीं हो सकते उनके साथ कुछ बुरे कामों का होना भी अवश्यंभावी है। इसलिए मानव से कुछ ऐसे कार्य भी हुए हैं जो स्वयं उसके लिए ही खतरनाक साबित हुए हैं। मानव स्वभाव से ही बुद्धिमान और सूझ-बूझ वाला होने के साथ-साथ ” महत्वाकांक्षी भी है। इसलिए वह अपनी जरूरतों के लिए नित्य नए मार्गो की तलाश करता हुआ आगे बढ़ने की ओर अग्रसर रहता है। ऐसी स्थिति में मानव बहुत स्वार्थी हो जाता है और वह मानवीयता के विशिष्ट गुणों को भूलने लगता है। इसी कारण हमारे समाज में वर्तमान में विभिन्न स्तरों पर असमानता स्पष्ट दिखाई देती है।
विकास की सोच ही मानव के कारण उत्पन्न हुई है। वह ईश्वर की सर्वोत्तम कृति है। कोई जीवन कृति ऐसी नहीं है जो स्वयं में परिवर्तन के लिए उस प्रकार से चिंतन कर सके जिस प्रकार से मानव सोचता रहता है। परन्तु जब से मानव में आध्यात्मिकता की कमी आने लगी है और भौतिकवादी प्रवृत्ति हावी होने लगी है, तब से विकास का स्वरूप परिवर्तित हो गया। विकास की धारणा पहले ‘बहुजन हिताय बहुजन सुखाय’ पर आधारित थी। परन्तु – आजकल विकास ने जो दिशा प्राप्त कर ली है, उसमें बहुत से गैर-मानवीय कार्यों को हवा दी है।

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